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दुनिया में सबसे आसान अगर कोई चीज़ है तो वो है किसी को गाली बकना । हर चीज़, हर शख़्स इतना accessible है कि आप एक @ से उस तक पहुँच सकते हैं । हर चीज़ को access करना फिर भी थोड़ा मुश्किल है इस वक़्त लेकिन लोग काफी accessible हैं । दुनिया वैसे भी बहुत छोटी है, social media ने उसे और छोटा बना दिया है । लोग अपने घरों में क्या कर रहे हैं से ले कर उनके घर में क्या पक रहा है, छोटी से छोटी बात आज सबको पता चल जाती है । कुछ दायरे और दीवारें हुआ करती थी society में, social media ने उन सारी बंदिशों को तोड़ दिया है । अब भैया से मिलने के लिए आपको कोई दीवार तोड़ने की ज़रुरत नहीं है । भैया उधर से live-stream कर सकते हैं । एक cement हुआ करता था, खैर जिनको पता है उनको पता है ।
ये दीवार थी हिन्दू-मुस्लमान की, Congress-BJP की, अमीर-गरीब की । अब ऐसी कोई दीवार नहीं बची । आप किसी को भी गाली बक सकते हैं। सरकार किसी को जेल में डालती है और आप उसके पूरे खानदान को गाली बक सकते हैं । आप तो उसको भी गाली बक सकते

हैं जो इस दुनिया में आयी/आया भी नहीं है । एक चीज़ होती है ‘below the belt’ जाना । जिसका साफ़ मतलब होता है नीति के विरुद्ध कोई काम करना । गाली बकने के इस खेल में हम इतने नंगे हो गए है कि कोई belt, कोई तमीज़ अब बची ही नहीं है । जो हमें समझ में आया सही, जो नही आया गलत । महाभारत के युद्ध में भी लोग दोपहर में लड़ते थे और शाम को साथ बैठा करते थे । आज का युद्ध इतना विशाल और भव्य है कि ये छोटी-मोटी चीज़ें हमें याद नहीं रहती । हम इन सब चीज़ों से बहुत ऊपर उठ चुके हैं ।
हर चीज़ में घुसने की इतनी लालसा है कि सोचना अब एक बहुत बड़ा खेल हो गया है । दुनिया छोटी थी ही साथ ही साथ हम भी छोटे हो गए हैं । इतने छोटे हो हो गए हैं कि अब बड़ा खेलना किसी को पसंद नही है । लोग तो test match को भी चार दिन में ख़त्म करने की बात करते हैं – बड़ा खेल खेलना किसी को भी पसंद नही है ।
खैर एक actor मरता है, लोग @ करके उसे ही mention करने लग जाते है । अब ये कौन बताए कि @ से आप दूसरे शख्स तक पहुँचने की कोशिश करते हैं या अपनी बात बताने की कोशिश करते हैं। खैर मैं तो बस बता रहा था ।
एक और शब्द है या बीमारी है selective outrage. किसी एक specific चीज़ को ले कर अगर आपको गुस्सा आता है और वही चीज़ जब किसी और के साथ हो तो आप चुप । ऐसा अगर है तो आप भी इस बीमारी के शिकार हो चुके हैं ।
अगर कुछ लोग किसी मज़हब को represent नहीं कर सकते (आप इस sentence को पाँच बार पढ़िए ) तो कुछ लोग पूरी नस्ल को भी represent नहीं कर सकते । मैंने कह दिया, आपने पढ़ लिया और अब आप गाली बक सकते हैं ।
आप hashtag के game में फँस कर असली मुद्दे तक मत आइये, आपका मन । आप Internet पर आ कर पूरी नस्ल को गाली बक दीजिये, पूरी नस्ल को एक चश्में से देख लीजिये – आपका मन ।
Boy’s Locker Room आया hashtag चल गया All Men उसके जवाब में चल गया Not All Men. फिर Girl’s Locker Room आया और वही hashtag को घुमा कर पेश कर दिया गया । इससे मुद्दा तो पीछे रह गया ना । गलत तो गलत ही होता है चाहे वो कोई भी करे । मगर बात ये है कि गलत को सही कैसे करना है । एक दूसरे को गाली बक देने से अगर चीज़ें सुधरती तो हर एक बॉर्डर पर Roadies का audition करवा सकते हैं । लेकिन चीज़ें ऐसे नहीं सुधर सकती । ये एक societal problem है । इसको सुधारने के लिए पूरी society को self-introspect की ज़रुरत है । अपने घर से शुरू करिए, पड़ोस से शुरू करिए, लोगों को समझाइये लेकिन कुछ करिए। अगर नहीं कर सकते तो फिर चुप हो जाइये, दुनिया वैसे ही बहुत नीचे जा चुकी है ।
इस incident में भी लोग जाति को निकाल कर ले आये हैं । गलत तो भैया कोई भी हो सकता है ना? गलती होने से पहले पूछा थोड़े ही जाता है कि ‘कौन जात हो?’
एक Joke:
एक चच्चा हैं पड़ोस में, सुबह दस लोगों को पैसे दे कर line में खड़े होने को कह दिए । पहला peg बनाने जा रहे थे कि twitter पर पढ़ा ‘शराब पीने के लिए पैसे हैं लेकिन रेल के भाड़े के लिए नहीं’ । चच्चा ने प* फ* ब* वाले शब्द का इस्तेमाल किया और neat peg मार गए।
आप सोचेंगे joke कहाँ है? Joke तो सर selective outrage है बाँकी सब तो economy सुधारने की कोशिश है ।
यहाँ तक पढ़ने के लिए शुक्रिया मिलते हैं अगली बार ।

4 Comments

  1. Deepika

    Bahut khoob <3

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  2. Priyanka Shruti

    Bhut badiya bro 🤩

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  3. Himmy

    Bhai #1😂✌️

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  4. Amit

    Aaj no Bhai 😇

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